वैसे इस हमले से कहीं न कहीं पाकिस्तान में हुए एक हमले की याद आती है ऐसी ही रैली , लोगों का जमघट , चाक चौबंद सुरक्षा लेकिन अंजाम कुछ और। चारों ओर था मातम का माहौल। पाकिस्तान ने खोया था एक महान नेता । हां यहां बात हो रही है बेनज़ीर भुट्टो की ।एक बेजोड़ शख्सियत । बदक़िस्मती से आपराधिक साज़िश ने ले लिया था विकराल रूप। लेकिन कहते हैं जो होता है वह अच्छे के लिए होता है खुशनसीब हैं भाजपा के वरिष्ठ नेता और भारत की जनता।
लेकिन विचारणीय है कि आखिर आम जनता का कोई शख्स क्यूं इस महान नेता पर हमला करना चाहेगा, या राजनीति के कोरे कागज़ को फिर किसीलेखक ने काली स्याही से रंगने की कोशिश की है पता नहीं। लेकिन यह तो निर्धारित है कि एक आत्मघाती वार करने की पूरी साज़िश तैयार की जा चुकी थी ।वह तो भला हो सुरक्षा व्यवस्था का जिसने मुस्तैदी दिखाई अन्यथा अंजाम भयावह भी हो सकता था।
ख़ैर कुछ भी हो लेकिन भारत की भूमि पर ऐसे महान नेता पर ऐसा प्रहार हंहंहंहंहंह.............
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