Saturday, May 8, 2010
ईमानदारी का अभाव
हर माता-पिता अपने बच्चों से पढ़-लिख कर बड़ा आदमी बनने की उम्मीद रखते हैं जिसका प्रभाव आज की पीढ़ी पर यूँ दिखता है की बच्चे अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने के लिए साल भर कड़ी मेहनत करते हैं लेकिन यदि बच्चों को परीक्षा में सफल होने के लिए नक़ल की jaroorat lage तो क्या kiya जाए ,समझ नहीं आता कि बच्चे तो बच्चे,jo अध्यापक या अध्यापिकाएं अपने विद्यालयों में ऐसा करवाते हैं,कैसे चैन से सो पाते होंगे?देश के भविष्य को चंद रुपयों के लिए ताक पर रख देना कहाँ तक सही है?विद्यार्थियों को ईमानदारी से कार्य करने का पाठ पढ़ाने वाले ऐसे अध्यापक व अध्यापिकाएं ज्ञान के मंदिर की शुद्धता धूल-धूसरित करने के सिवा और कुछ नहीं कर रहे.ऐसे में यदि ये विद्यार्थी ईमानदारी व सच्चाई को खोखले किताबी शब्द समझें तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।
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