Sunday, April 5, 2015

मरते किसान, सोती सरकार

सच है कि देशभर में बेमौसम बारिश ने फसलों को भीषण नुकसान पहुंचाया है। जायज़ है कि फसलों की बर्बादी किसानों पर पहाड़ बनकर टूट रही है। सच है कि पीएम मोदी ने हमेशा किसानों का शुभचिंतक बनकर उनके लिए हर संभव मदद की बात कही। लेकिन सच तो ये है कि इस मुश्किल वक्त में अपनी पीड़ा तो किसान को ही पता है। कोई किसान आत्महत्या तो कोई किसी कोने में बैठकर रो-रोकर ये सोच रहा है कि वो अपनी बहन, बेटी या बच्चों की पढ़ाई का खर्च कैसे उठाएगा। दुखद है कि नई सरकार से नई उम्मीदें धरी की धरी रह गई हैं। कहीं किसानों को 2100 रुपए का मुआवज़ा दिया जाता है तो कहीं 2900 रुपए। सरकार में बैठे लोग क्या इस बात से अंजान हैं कि चंद रुपए किसानों की पीड़ा को थोड़ा भी कम नहीं कर पाएंगे। ऐसे सरकारी फैसलों से तो ये ही साबित होता है कि जिन किसानों ने खुदकुशी की, उनका फैसला ठीक था। क्योंकि कोई किसान भूखा ज़रूर रह सकता है लेकिन अपने परिवार को भूखा नहीं देख सकता...

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