Monday, December 31, 2012

वक्त मिले तो जरूर पढ़ियेगा...


 शब्द ज्यादा हैं शायद आप पढ़ें न, लेकिन पढ़ियेगा तो कमेंट जरूर दीजियेगाआभारी रहूंगा...

                       कैसे रुके बलात्कार की घटनाएंआखिर कैसे?
                       क्या वजह हो सकती है इन घटनाओं की?

अशिक्षित होना...माफ कीजियेगा शिक्षित वर्ग में भी आए दिन ऐसे मामले सामने आते हैं, अमीर होनामाफ कीजियेगा गरीब वर्ग में भी ये बातें आम हो चली हैं?,
मवाली होनाफिर शरीफ लोग कैसे इन मामलों में फंसते हैं?

किसके चेहरे पर लिखा है कि उसके अंदर की हैवानियत जागने वाली है या कब जाग जाएगी? मामला शिक्षित-अनपढ़, अमीर-गरीब, बड़े-छोटे, शराफत-मवालीगीरी से बहुत आगे बढ़ गया है...दोस्तों सच कहूं तो ये संकीर्ण विचार हमारे अंदर आपसी बातों से उपजते हैं...
(मसलन- एक महाशय अपने मित्र से कहते हैं कि आप जब स्त्रियों संबंधी विषयों पर बात नहीं कर सकते तो जीवन में क्या करेंगे...)
सच में दोस्तों ऐसी घृणित मानसिकता आगे चल कर किस लड़की, महिला या बच्ची को अपना शिकार बना ले...कहना मुश्किल है...ऐसे विचारों से हमें दूरी बनानी ही होगी...

पुलिस या सरकार को भी सीधे इन घटनाओं के लिए ऐसे दोषी मान लिया जाता है जैसे कि स्कूल में अपने बच्चे की गलती का भुगतान किसी न किसी रूप में उसके माता-पिता को भी भुगतनी पड़ती है...

बड़ा सवालः अगर रेप की कोई घटना हमारे सामने घट रही हों तो क्या हम इसे रोकने की कोशिश करेंगे?...बताइये क्या कोशिश करेंगे?...क्या लड़की की चीख हमारे कानों से होते हुए हमारे शरीर को उस अत्याचार का विरोध करने के लिए मजबूर करेगी? सटीक शब्द नहीं मिलते क्या लिखूं...चन्द शब्दों से यहां अपनी बात को पूर्ण विराम देता हूं कि...

               बाहरी आंदोलनों से जीतना अब मुश्किल हो चला है...
                  खुद में चल रहे आंदोलन को जीत सको तो जीत लो...