' मैंगो मैन' का सवाल
यूपीए-2 ने पूरे देशवासियों के साथ क्या-क्या किया, ये किसी से छिपा नहीं है..जिसे आम जनता कहा जाता है, उसके तो खून के आंसू भी निकल कर सूख गए, जबकि उच्च वर्ग के लोगों ने मध्यम वर्गीय न होने के लिए ईश्वर का शुक्रिया अदा किया...निम्न वर्ग की तो पूछो ही मत...यूपीए-2 पर आरोप लगे कि उसने आकाश, जमीन और पाताल में भ्रष्टाचार का खेल खेला है...लेकिन पता नहीं क्यों जनता के सामने पर्दाफाश होने के बावजूद इन मंत्रियों की आखों में जरा भी पछतावा नहीं...खैर, प्रधानमंत्री 2014 में जीत (जो कि इस सरकार के लिए नामुमकिन लगती है) के रास्ते तलाश रहे हैं...उनका नाम आगे रख कर मिशन 2014 फतह करने की कोशिश में रणनीति के मुताबिक तुरुप का इक्का फेंका गया है- मंत्रिमंडल में फेरबदल करके...
समझ से परे हैं इतने सालों से आरोप लगने के बावजूद नए चेहरों को लाने में इतना समय कैसे लगा? क्यों उन सात मंत्रियों ने फेरबदल से ठीक पहले अपना इस्तीफा सौंप दिया, ये इस्तीफे उस वक्त क्यों नहीं सौंपे गए जब सरकार पर रोज़ाना नए-नए आरोप लगाए जा रहे थे...जनता के विश्वास का कत्ल करने में क्या सत्ता और क्या विपक्ष सबने भूमिका निभाई...न जाने कितनी बार राजनीति का व्यापारीकरण किया गया...आम नागरिक होने के नाते इस निरुत्तर सरकार से उस एक-एक पैसे का हिसाब मांगते हैं जो हमनें कभी अपना फर्ज समज कर दिए तो कभी मजबूरी समझकर..क्या आ पाएगी कोई ऐसी नीति जिससे जनता द्वारा कितना टैक्स जमा हुआ, वित्त मंत्रालय से कितने पैसे कहां खर्च हुए, किस योजना के लिए केंद्र किस राज्य को कितनी रकम दे रहा है...ये सभी बातें आम आदमी को पता चल सके...जनलोकपाल तो नहीं ला पा रहे...कम से कम इतनी जानकारी तो दे दो...गैस सिलेंडर का नया कनेक्शन लेने के लिए तो पूछताछ ऐसे की जाती है जैसे गैस कनेक्शन नहीं बल्कि एफआईआर दर्ज करानी हो...भूखों मर जाओ पर 6 से ज्यादा सिलेंडर नहीं ले सकते...हर चीज की अनाव्शयक कीमत लगा दी गई है, अब हम यानि की 'मैंगो मैन' पूछता हैं कि कोई ऐसी नीति है, जिससे हमें संतुष्टि भरा जवाब और हिसाब दिया जा सके... हिम्मत है हिसाब देने की...बोलें....
दोस्तों शायद ही कोई जवाब मिले लेकिन मेरे इस तुच्छ लेख को कोई सत्ताधारी मंत्री साहब पढ़ेंगे तो शायद इन दिनों उनके विचार कुछ ऐसे हों..............कि
हमारी जनता कभी न कुछ कह पाएगी,
आंसुओं को अपने बस पोंछती रह जाएगी,
खुल कर पैसे बटोरो यहां, भनक न लगने पाएगी,
अरे 6 की जगह 3 सिलेंडर भी कर दो,
तो भी बस छटपटा कर रह जाएगी,
हममें और विपक्ष में से कोई न कोई तो आएगी,
जब विपक्ष यही रंग दिखाएगा,
तो खुद हम तक चल कर आएगी,
ज्यादा नहीं ,बस एक बोतल की बात है,
फिर देखो, कैसे दौड़ी-दौड़ी वोट देने जाएगी,
हमारी जनता..............