विश्व
कप शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं .लगभग सभी खेमों की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।भारत में होने वाले इस महासंग्राम के लिए भारतीय खेमे को एक प्रबल दावेदार माना जा रहा है.लेकिन विश्वकप २००७ में भी भारत से कुछ इसी तरह की 'उम्मीदें' ओ माफ़ कीजियेगा 'जरूरत से ज्यादा उमीदें' लगाई गई थीं.परिणाम भी बहुत जल्दी सबके सामने आ गया। इस परिप्रेक्ष्य में भारतीय मीडिया का भी कोई जवाब नही , कभी सिर -आँखों पर बैठाती है तो कभी जमीन में १० फुट नीचे!पिछले कई मैचों से फॉर्म में नहीं चल रहे कप्तान माही ये कहते हैं की "हम विश्वकप सचिन को उपहार में जीत के देंगे".सच में!लेकिन किसके सहारे,युवराज के 'जिनका राज अब कभी-कभी ही चलता है' या सचिन के जिनसे हर पारी में सैकड़ों की उम्मीद बेईमानी होगी या फिर अभी-अभी चोट से उबरे सहवाग और गंभीर के। यदि भारतीय टीम की तैयारियां अच्छी है तो इंग्लॅण्ड,दक्षिण अफ्रीका और ३साल से विश्वविजेता ऑस्ट्रेलिया भी कम नहीं.चाहे किसी टीम के कप्तान हों या फिर कोई विशेषज्ञ,बड़ी ही चतुराई से सभी भारत को २०११ विश्वविजेता की झूठी उपाधि दे डालते हैं.कहीं ये धोनी की टोली पर अतिरिक्त दबाव बनाने की कोशिश तो नहीं।
२००७मे भी कप लाने गई टीम इंडिया के साथ करोड़ों लोगों की दुआएं थीं आज भी हैं.लेकिन जरूरत से ज्यादा सपने देखने किसी को रास नही आते.धोनी ये जानते हैं की जो मीडिया आज उनके बयानों को विपक्षियों पर तीर की तरह मारती है वह भविष्य में हो सकने वाले ख़राब प्रदर्शन पर उनकी कप्तानी को भी कटघरे में ले आयेगी.लेकिन फिर भी अनावश्यक बयानबाजी लागतान जारी है जिसका फायदा केवल और केवल अन्य टीमें उठाएंगी.
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